बाणगंगा नदी

By admin, 29 June, 2026

बाणगंगा नदी (Banganga River) राजस्थान के पूर्वी भाग की एक अत्यंत महत्वपूर्ण और ऐतिहासिक नदी है, जो मुख्य रूप से जयपुर और उसके आस-पास के क्षेत्रों को सिंचित करती है। महाभारत काल से जुड़े होने के कारण इसका पौराणिक महत्व भी बहुत अधिक है।

कुल लंबाई: लगभग 380 किलोमीटर

रुण्डित नदी का अर्थ है ऐसी नदी जो किसी समुद्र, झील या बड़ी नदी तक नहीं पहुँचती, बल्कि रास्ते में ही समाप्त हो जाती है।

इस नदी से जुड़े सभी महत्वपूर्ण और परीक्षा उपयोगी फैक्ट्स नीचे दिए गए हैं:

1. उपनाम (Other Names)

  • अर्जुन की गंगा (Arjun ki Ganga): पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, महाभारत काल में अज्ञातवास के दौरान जब माता द्रौपदी को प्यास लगी थी, तब अर्जुन ने जमीन पर तीर (बाण) मारकर इस नदी की धारा निकाली थी। इसी कारण इसे 'बाणगंगा' या 'अर्जुन की गंगा' कहा जाता है।
  • रुण्डित नदी (Rundit River): भूगोल की भाषा में इसे 'रुण्डित सरिता' कहा जाता है। ऐसी नदी जो अपनी मुख्य नदी (जैसे यमुना) में मिलने से पहले ही मैदानी भाग में समाप्त या विलीन हो जाती है, उसे रुण्डित नदी कहते हैं।
  • ताला नदी

2. उद्गम और बहाव मार्ग (Origin & Course)

  • उद्गम (Origin): यह नदी जयपुर ग्रामीण जिले में स्थित बैराठ की पहाड़ियों (Bairath Hills) से निकलती है।
  • बहाव वाले जिले: यह नदी जयपुर ग्रामीण, कोटपूतली-बहरोड़, दौसा और भरतपुर जिलों में बहती है।
  • अंतिम बिंदु (Vilai): ऐतिहासिक रूप से यह नदी आगे बढ़कर उत्तर प्रदेश के फतेहाबाद (आगरा) के पास यमुना नदी में मिलती थी। लेकिन वर्तमान में पानी की कमी के कारण यह भरतपुर के मैदानों (घना पक्षी विहार के पास) में ही जाकर विलुप्त हो जाती है।

🏗️ प्रमुख बाँध और परियोजनाएँ (Dams)

बाणगंगा नदी पर दो बेहद महत्वपूर्ण ढाँचे बने हुए हैं जो परीक्षाओं में अक्सर पूछे जाते हैं:

  • जमवा रामगढ़ बाँध (Jamwa Ramgarh Dam): जयपुर में इस नदी पर 'रामगढ़ बाँध' बनाया गया है। एक समय में यह बाँध पूरे जयपुर शहर के लिए पेयजल (Drinking Water) का मुख्य स्रोत हुआ करता था। इस क्षेत्र को 'जयपुर का नंदनकानन' भी कहा जाता है।
  • अजान बाँध (Ajan Dam): भरतपुर में इस नदी के पानी को रोककर 'अजान बाँध' बनाया गया है। इसी बाँध से प्रसिद्ध केवलादेव राष्ट्रीय उद्यान (घना पक्षी विहार) को पानी की आपूर्ति की जाती है, जो साइबेरियन क्रेन और अन्य पक्षियों के लिए प्रसिद्ध है।

🏛️ ऐतिहासिक महत्व (Historical Importance)

इस नदी के उद्गम स्थल यानी बैराठ (विराट नगर) में प्राचीन सभ्यता के अवशेष मिले हैं:

  • बैराठ सभ्यता: यह एक प्रसिद्ध मौर्यकालीन और महाभारतकालीन पुरातात्विक स्थल है, जहाँ सम्राट अशोक का भाब्रू शिलालेख खोजा गया था। यह पूरी सभ्यता बाणगंगा नदी के किनारे ही फली-फूली थी।
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