माही नदी (Mahi River) भारत की एक बेहद महत्वपूर्ण और पवित्र नदी है, जो मुख्य रूप से मध्य प्रदेश, राजस्थान और गुजरात में बहती है। इसकी सबसे अनोखी बात यह है कि यह कर्क रेखा (Tropic of Cancer) को दो बार पार करती है।
राजस्थान में माही नदी की कुल लंबाई 171 किलोमीटर है
यहाँ माही नदी से जुड़ी कुछ मुख्य और दिलचस्प बातें दी गई हैं:
1. उद्गम और बहाव (Origin and Course)
- उद्गम (Origin): यह नदी मध्य प्रदेश के धार जिले में विंध्याचल पर्वत श्रेणी (मिन्डा ग्राम के पास अमझेरा) से निकलती है।
- लंबाई: इसकी कुल लंबाई लगभग 583 किलोमीटर है।
- बहाव का रास्ता: मध्य प्रदेश से उत्तर की ओर बहते हुए यह राजस्थान के बांसवाड़ा और डूंगरपुर जिलों (वागड़ क्षेत्र) में प्रवेश करती है। इसके बाद, यह दक्षिण-पश्चिम की ओर मुड़कर गुजरात में दाखिल होती है और अंत में खंभात की खाड़ी (अरब सागर) में मिल जाती है।
2. मुख्य विशेषताएं और उपनाम
- कर्क रेखा को दो बार काटना: यह भारत की एकमात्र ऐसी नदी है जो कर्क रेखा को 'U' आकार बनाते हुए दो बार काटती है।
- उपनाम: इसे "वागड़ की गंगा", "काँठल की गंगा" और "आदिवासियों की गंगा" भी कहा जाता है, क्योंकि यह दक्षिणी राजस्थान के आदिवासी क्षेत्रों के लिए जीवनदायिनी है।
3. मुख्य बांध और परियोजनाएं (Dams)
- माही बजाज सागर बांध (Mahi Bajaj Sagar Dam): यह राजस्थान के बांसवाड़ा जिले में स्थित है और राजस्थान का सबसे लंबा बांध है। यह जल विद्युत और सिंचाई का बड़ा स्रोत है।
- कडाणा बांध (Kadana Dam): यह बांध गुजरात के महीसागर जिले में स्थित है।
- वानकबोरी व्यपवर्तन बांध (Wanakbori Weir): यह भी गुजरात में सिंचाई के काम आता है।
4. सहायक नदियाँ (Tributaries)
माही नदी की प्रमुख सहायक नदियों में शामिल हैं:
- सोम (Som)
- जाखम (Jakham)
- अनास (Anas)
- चाप (Chap)
- मोरन (Moran)
5. धार्मिक व सांस्कृतिक महत्व
- बेणेश्वर धाम (Baneshwar Dham): डूंगरपुर जिले में सोम, माही और जाखम नदियों के त्रिवेणी संगम पर 'बेणेश्वर धाम' स्थित है। यहाँ हर साल माघ पूर्णिमा को एक बहुत बड़ा मेला लगता है, जिसे "आदिवासियों का कुंभ" कहा जाता है।
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